वैज्ञानिक प्रबन्ध विचारधारा | विशेषताएं , मान्यताएं एवं मुल्यांकन
वैज्ञानिक प्रबन्ध की विचारधारा (Scientific Management Approach) का विकास औद्योगिक क्रान्ति के दौरान हुआ था। बहुत पुरानी होते हुए भी, यह विचारधारा Claude George के अनुसार अपने समय से 20 से 30 वर्ष आगे थी। इसे उत्पादकता या दक्षता विचारधारा "Productivity or Efficiency Approach) भी कहा जाता है। टेलर इस विचारधारा के प्रतिपादक रहे हैं।
यह विचारधारा संसाधनों की उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान देती है। अतः यह कार्यो, समय, ' सामग्री, यंत्रों, किस्म आदि के प्रमाणीकरण पर जोर देती है। यह श्रमिकों का वैज्ञानिक ढंग से चयन करने, उन्हें प्रशिक्षित करने कार्य का वैज्ञानिक वितरण करने तथा उनसे सर्वश्रेष्ठ विधि से कार्य करवाने पर बल देती है। यह विचारधारा श्रमिकों से अधिकतम कार्य कराने के लिए प्रेरणात्मक मजदूरी पद्धतियों को भी लागू करता है।
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विशेषताएँ एवं मान्यताएँ (Characteristics and Assumptions) : वैज्ञानिक प्रबन्ध विचारधारा की प्रमुख मान्यताएँ एवं विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं:
यह विचारधारा प्रत्येक कार्य करने के लिए एक सर्वश्रेष्ठ विधि (One Best way) खोजने पर बल देती है।
यह कार्य में रूढ़ियों, अनुमान, "भूल एवं सुधार विधियों के स्थान पर प्रयोग, परीक्षण व विश्लेषण पर बल देती है।
यह प्रत्येक कार्य के लिए समय, सामग्री व कार्यविधि का प्रमाणीकरण करती है।
यह प्रत्येक श्रमिक के प्रत्येक दिन के उचित कार्य तथा मजदूरी (Fair day's work and wages) का निर्धारण करती है |
यह समस्त कार्यों एवं संगठन संरचना में विशिष्टीकरण को महत्त्व देती है।
यह विचारधारा कर्मचारियों के चुनाव, प्रशिक्षण, कार्य वितरण, कार्य दशाओं के निर्धारण आदि में वैज्ञानिक विधि एवं तर्कयुक्त दृष्टिकोण को अपनाती है।
यह विचारधारा श्रमिकों एवं मालिकों के बीच मैत्री, सहकारिता, सद्भाव को उत्पादकता वृद्धि की पूर्व शर्त मानती है।
यह श्रमिकों व मिल मालिकों में परस्पर सहयोग के लिए दोनों में मानसिक क्रान्ति लाने पर जोर देती है।
यह अधिकतम उत्पादकता व आधिक्य का सृजन करके दोनों पक्षों में हित-संघर्ष, टकराव व हित-हड़पने की प्रवृत्ति को दूर करने पर जोर देती है।
यह सीमित उत्पादन के स्थान पर अधिकतम उत्पादन का लक्ष्य स्वीकार करती है। यह उत्पादन अवरोध को 'सामाजिक अपराध मानती है।
यह उत्पादन वृद्धि के लिए प्रेरणात्मक मजदूरी पद्धतियों, श्रम-प्रबन्ध हित सामंजस्य तथा विज्ञान के विकास पर जोर देती है |
मूल्याकन (Evaluation)
वैज्ञानिक प्रबन्ध की विचारधारा को सार्वभौमिक मानकर इसका प्रयोग अनेक संगठनों में किया जा रहा है। इसके पक्ष में प्रमख तर्क निम्न प्रकार हैं
वैज्ञानिक प्रबन्ध द्वारा न्यूनतम लागत पर अधिकतम उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
यह व्यर्थ बर्बादी को रोकने में समर्थ है।
यह तर्क, विश्लेषण व वैज्ञानिक अध्ययन पर जोर देती है।
मानसिक क्रान्ति' से अनावश्यक हित टकराव व संघर्ष समाप्त हो जाते हैं।
इससे श्रमिकों की आय, सम्पन्नता व संतुष्टि में वृद्धि होती है।
इसमें प्रमापित वस्तुओं का उत्पादन होता है।
इसको अपनाने से विशिष्टीकरण के लाभ प्राप्त होते हैं।
कुछ लोगों द्वारा वैज्ञानिक प्रबन्ध विचारधारा की आलोचनाएँ भी की गई हैं। ये निम्न प्रकार हैं :
यह उत्पादकता-प्रधान विचारधारा है जो केवल अधिकतम उत्पादन के लक्ष्य को ही ध्यान में रखती है।
यह कर्मचारियों के जीवन को यांत्रिकता में बदल देती हैं।
यह मानवीय पहलू की उपेक्षा करती है। इसमें श्रमिकों की भावनाओं व आकांक्षाओं का कोई स्थान नहीं होता है।
यह कर्मचारी को केवल 'आर्थिक-विवेकशील मनुष्य" (Economic-rational man) के रूप में ही देखती है।
यह केवल आर्थिक प्रेरणाएँ प्रदान करती है।
यह केवल उपयोगितावादी दृष्टिकोण (Utilitarian view) ही प्रस्तुत करती है, व्यवहारवादी नहीं।
यह विचारधारा कार्यशाला प्रबन्ध (Shop management) पर ही सम्पूर्ण ध्यान देती है। यह प्रबन्ध की सम्पूर्ण विचारधारा नहीं है। कुछ आलोचकों के अनुसार यह “निरंकुश प्रबन्ध को बढ़ावा देती है।
यह कठोर श्रम, कट्टरता व हठधर्मिता का सहारा लेती है। यह प्रत्येक स्थिति में विशिष्टिकरण,प्रमापीकरण पर ध्यान

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